Sunday, September 15, 2013

वर्त्तमान शिक्षा प्रणाली…….गुलामी का षड्यंत्र


वर्त्तमान शिक्षा प्रणाली…….गुलामी का षड्यंत्र

1858 में Indian Education Act बनाया गया आज हमारी शिक्षा व्यवस्था इसी कानून पर आधारित है यह मैकोले नाम के अँगरेज़ ने बनायीं थी हमें गुलाम बनाने के लिए और हमारी महान सभ्यता और संस्कृति को नस्ट करने के लिए…..मैकोले का स्पष्ट कहना था कि भारत को हमेशा-हमेशा के लिए अगर गुलाम बनाना है तो भारत कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त करना होगा और उसकी जगह अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी और तभी इस देश में शरीर से भारतीय लेकिन दिमाग से अंग्रेज पैदा होंगे और जब इस देश की यूनिवर्सिटी से निकलेंगे तो हमारे हित में काम करेंगे,मैकाले का भूत आज सबसे अधिक प्रसन्न होगा, यह देखकर कि 179 साल पहले की गयी उसकी भविष्यवाणी सही साबित हुई.........

मैकोले एक मुहावरा इस्तेमाल कर रहा है “कि जैसे किसी खेत में कोई फसल लगाने के पहले पूरी तरह जोत दिया जाता है वैसे ही इसे जोतना होगा और अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी” इसलिए उसने सबसे पहले गुरुकुलों को गैरकानूनी घोषित किया, जब गुरुकुल गैरकानूनी हो गए तो उनको मिलने वाली सहायता जो समाज के तरफ से होती थी वो गैरकानूनी हो गयी, फिर संस्कृत को गैरकानूनी घोषित किया, और इस देश के गुरुकुलों को घूम घूम कर ख़त्म कर दिया उनमे आग लगा दी, उसमे पढ़ाने वाले गुरुओं को उसने मारा-पीटा, जेल में डाला, सारे गुरुकुलों को ख़त्म किया गया और अंग्रेजी शिक्षा को कानूनी घोषित किया गया और कलकत्ता में पहला कॉन्वेंट स्कूल खोला गया, उस समय इसे फ्री स्कूल कहा जाता था, इसी कानून के तहत भारत में कलकत्ता यूनिवर्सिटी बनाई गयी, बम्बई यूनिवर्सिटी बनाई गयी, मद्रास यूनिवर्सिटी बनाई गयी और ये तीनों गुलामी के ज़माने के यूनिवर्सिटी आज भी इस देश में हैं और हमारी शिक्षा व्यवस्था मकौले का वही Indian Education Act है………….अर्थात आज भी हमारे भारत में वही शिक्षा व्यवस्था चल रही है जो मैकोले ने हमें गुलाम बनने के लिए बनायीं थी और आज यही कारण है कि अपनी महान संस्कृति को हम स्वयं ही शिक्षा के नाम पर नस्ट करने में व्यस्त हैं…….और सच्चाई यही है कि हमारा अध्यात्म हमारी संस्कृति आज के विज्ञानं से अत्यधिक उच्च और सम्पन्न है आवश्यकता है तो उसे अपनाने की और मैकोले के षड़यंत्र को विफल करने की……!यह तभी संभव है जब हम इस Indian educational act के षड़यंत्र को नस्ट कर पायें…………”गुरुकुल” के बारे में बहुत से लोगों को यह भ्रम है की वहाँ केवल संस्कृत की शिक्षा दी जाती थी जो की गलत है यह Indian Education Act द्वारा फैलाया गया भ्रम है । 1820 में विलियम एडम नाम का एक अँगरेज़ आया था……उसने पुरे भारत का सर्वे कराया और ब्रिटिश संसद में 1117 पन्ने की एक रिपोर्ट प्रस्तुत की उस रिपोर्ट के अनुसार भारत में गुरुकुल भारत की शक्ति और समृद्धि का मुख्य आधार है भारत में विज्ञान की 20 से अधिक शाखाएं रही है जो की बहुत पुष्पित पल्लवित रही है जिसमें प्रमुख १. खगोल शास्त्र २. नक्षत्र शास्त्र ३. बर्फ़ बनाने का विज्ञान ४. धातु शास्त्र ५. रसायन शास्त्र ६. स्थापत्य शास्त्र ७. वनस्पति विज्ञान ८. नौका शास्त्र ९. यंत्र विज्ञान १०. astrophysics ११.चिकित्सा विज्ञानं आदि इसके अतिरिक्त 20 अन्य विषयों कि भी शिक्षा समृद्ध रूप से गुरुकुलों में दी जाती हैं। संस्कृत भाषा मुख्यतः माध्यम के रूप में, उपनिषद एवं वेद छात्रों में उच्चचरित्र एवं संस्कार निर्माण हेतु पढ़ाए जाते हैं।(विलियम एडम के 1117 पन्ने की रिपोर्ट में भारत के विश्वविख्यात उच्चविज्ञान तकनीक को प्रमाणित करने वाले पर्याप्त उदहारण उपलब्ध हैं यहाँ सभी का वर्णन करना सभव नहीं)
थोमस मुनरो सन 1813 के आसपास मद्रास प्रांत के राज्यपाल थे, उन्होंने अपने कार्य विवरण में लिखा है मद्रास प्रांत (अर्थात आज का पूर्ण आंद्रप्रदेश, पूर्ण तमिलनाडु, पूर्ण केरल एवं कर्णाटक का कुछ भाग ) में 400 लोगो पर न्यूनतम एक गुरुकुल है। उत्तर भारत (अर्थात आज का पूर्ण पाकिस्तान, पूर्ण पंजाब, पूर्ण हरियाणा, पूर्ण जम्मू कश्मीर, पूर्ण हिमाचल प्रदेश, पूर्ण उत्तर प्रदेश, पूर्ण उत्तराखंड) के सर्वेक्षण के आधार पर जी.डब्लू.लिटनेर ने सन1822 में लिखा है, उत्तर भारत में 200 लोगो पर न्यूनतम एक गुरुकुल है। माना जाता है की मैक्स मूलर ने भारत की शिक्षा व्यवस्था पर सबसे अधिक शोध किया है, वे लिखते है “भारत के बंगाल प्रांत (अर्थात आज का पूर्ण बिहार, आधा उड़ीसा, पूर्ण पश्चिम बंगाल, आसाम एवं उसके ऊपर के सात प्रदेश) में 80 हज़ार से अधिक गुरुकुल है जो कि कई सहस्त्र वर्षों से निर्बाधित रूप से चल रहे है”।

उत्तर भारत एवं दक्षिण भारत के आकडों के कुल पर औसत निकलने से यह ज्ञात होता है की भारत में 18 वी शताब्दी तक 300 व्यक्तियों पर न्यूनतम एक गुरुकुल था। एक और चौकानें वाला तथ्य यह है की 18वी शताब्दी में भारत की जनसंख्या लगभग 20 करोड़ थी, 300 व्यक्तियों पर न्यूनतम एक गुरुकुल के अनुसार भारत में 7लाख 32 हज़ार गुरुकुल होने चाहिए। अब रोचक बात यह भी है की अंग्रेज प्रत्येक दस वर्ष में भारत में भारत का सर्वेक्षण करवाते थे उसे के अनुसार 1822 के लगभग भारत में कुल गांवों की संख्या भी लगभग 7 लाख 32 हज़ार थी, अर्थात प्रत्येक गाँव में एक गुरुकुल(1834 में मेकॉले के सर्वेक्षण में ऐसे ही तथ्य सामने आते हैं) 16 से 17 वर्ष भारत में प्रवास करने वाले शिक्षाशास्त्री लुडलो ने भी 18वी शताब्दी में यहीं लिखा की “भारत में एक भी गाँव ऐसा नहीं जिसमें गुरुकुल नहीं एवं एक भी बालक ऐसा नहीं जो गुरुकुल जाता नहीं”।

राजा की सहायता के बिना, समाज से पोषित इन्ही गुरुकुलों के कारण 18वी शताब्दी तक भारत में साक्षरता 97%थी, बालक के 5 वर्ष, 5 माह, 5 दिवस के होते ही उसका गुरुकुल में प्रवेश हो जाता था। प्रतिदिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक विद्यार्जन का क्रम 14 वर्ष तक चलता था। जब बालक सभी वर्गों के बालको के साथ निशुल्कः 20 से अधिक विषयों का अध्ययन कर गुरुकुल से निकलता था, तब आत्मनिर्भर, देश एवं समाज सेवा हेतु सक्षम हो जाता था।इसके उपरांत विशेषज्ञता (पांडित्य) प्राप्त करने हेतु भारत में विभिन्न विषयों वाले जैसे शल्य चिकित्सा, आयुर्वेद, धातु कर्म आदि के विश्वविद्यालय थे, नालंदा एवं तक्षशिला तो 2000 वर्ष पूर्व के है परंतु मात्र 150 -170 वर्ष पूर्व भी भारत में 500-525 विश्वविद्यालय थे।
मैकोले 1834 के आस पास भारत आया था …….भारत कि आध्यात्मिक सांस्कृतिक सामाजिक व्यवस्था से वह अत्यंत प्रभावित था उसके सर्वे के रिपोर्ट भी उपलब्ध हैं और आश्चर्यजनक हैं छोटा सा अंश प्रस्तुत करूँगा 2 Feb 1835 में ब्रिटिश पार्ल्यामेंट में दिया गया उसका भाषण “I have traveled across the length and breadth of India and have not seen one person who is a

beggar, who is a thief, such wealth I have seen in this country, such high moral values, people of such caliber, that I do not think we would ever conquer this

country, unless we break the very backbone of this nation, which is her spiritual and

cultural heritage, and, therefore, I propose that we replace her old and ancient education system, her culture, for if the Indians think that all that is foreign and

English is good and greater than their own, they will lose their self esteem, their native culture and they will become what we want them, a truly dominated nation”……..थोमस बेबिगटन मैकोले (टी.बी.मैकोले) कई वर्षों भारत में यात्राएँ एवं सर्वेक्षण करने के उपरांत समझ गया की अंग्रेजो पहले के आक्रांताओ अर्थात यवनों, मुगलों आदि भारत के राजाओं, संपदाओं एवं धर्म का नाश करने की जो भूल की है, उससे पुण्यभूमि भारत को पराधीन बनाना असंभव है, अपितु संस्कृति, शिक्षा एवं सभ्यता का नाश करे तो इन्हें पराधीन करने का स्वप्न पूर्ण हो सकता है। इसी कारण “इंडियन एज्यूकेशन एक्ट” बना कर समस्त गुरुकुल बंद करवाए गए। हमारे शासन एवं शिक्षा तंत्र को इसी लक्ष्य से निर्मित किया गया ताकि नकारात्मक विचार, हीनता की भावना, जो विदेशी है वह अच्छा, बिना तर्क किये रटने के बीज आदि बचपन से ही बाल मन में घर कर ले और अंग्रेजो को प्रतिव्यक्ति संस्कृति, शिक्षा एवं सभ्यता का नाश का परिश्रम न करना पड़े।

हमारे वेद पुराण उपनिषद एवं सभी धार्मिक ग्रन्थ आज भी भारत के अध्यात्म और भारत की वैज्ञानिक श्रेष्ठता को दर्शाते हैं किन्तु हमें उन सब से दूर रखा गया है कारण क्या है हमारी वर्तमन शिक्षा व्यवस्था अर्थात मैकॉले का बनाया Indian educational act 1858 हमारी संस्कृति को ढोंग और पाखंड बताता है और दुर्भाग्य यह है की हमने मान भी लिया है मैकोले अपने षड़यंत्र में सफल हुआ है और हम सब कुछ जानते बुझते भ्रम में है पूर्ण रूप से आज भी उसके गुलाम……..

मैकोले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर चिट्ठी है वो, उसमे वो लिखता है कि “इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे और इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने परम्पराओं के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने मुहावरे नहीं मालूम होंगे, जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से अंग्रेजियत नहीं जाएगी और भारत शारीरिक रूप से आजाद होने पर भी मानसिक रूप से हमेशा हमारा गुलाम बना रहेगा”
और आज मैकोले कि लिखी चिट्टी कि सच्चाई सामने दिख रही है हमारे भारत में……….अंत में पुन: मेकौले का वह कथन लिख रहा हूँ……
कुछ जीत ऐसी होती हैं जिन पर कभी आंच नहीं आती। यह ऐसा साम्राज्य है जिसे कोई समाप्त नहीं कर सकता। यह अविनाशी साम्राज्य अँग्रेजी भाषा, कला और कानून का है।”हमें अंग्रेज़ी साम्राज्य के विस्तार के लिए एक ऐसा वर्ग बनाना है जो अपनी जड़ों से घृणा करे। वे लोग रंग व रक्त से हिंदुस्तानी होंगे किन्तु आचार-व्यवहार में अंग्रेज़ होंगे।”
यही सच आज हमारे सामने है हम पूरी तरह काले अंग्रेज़ बनते जा रहे है !!

15 अगस्त 1947 से पूर्व हम गुलामी का विरोध करते थे आज हम गुलामी का सम्मान करते हैं……
प्रश्न केवल इतना है यह गुलामी कब तक रहेगी कब तक हम अपनी महान संस्कृति और सभ्यता का अपमान करते रहेंगे……….जो शिक्षा व्यवस्था हमें गुलाम बनाने के लिए बनायीं गयी है कब तक उसे अपनाकर हम गुलाम बने रहेंगे………..कब तक अपमान करते रहेंगे अपने शहीदों का….. उनके सपनों का?


Saturday, September 14, 2013

कश्मीर की सच्चाई....

मित्रो, आपको हम एक ऐसी दर्दनाक सच्चाई बताने जा रहे है। जो देश के 99% से ज्यादा लोगो को पता नहीं है। आप सभी ने सुना होगा कश्मीरी पंडितो के बारे में। हम सभी ने सुना है की हा कुछ तो हुआ था कश्मीरी पंडितो के साथ। लेकिन क्या हुआ था क्यों हुआ था यह ठीक से पता नहीं है। हम आपको वह बात विस्तार में बताने जा रहे है की क्या हुआ था कश्मीर में और क्या हुआ था कश्मीरी पंडितो के साथ।

पार्ट 1: कश्मीर का खुनी इतिहा
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कश्मीर का नाम कश्यप ऋषि के नाम पर पड़ा था. कश्मीर के मूल निवासी सारे हिन्दू थे। कश्मीरी पंडितो की संकृति 5000 साल पुराणी है और वो कश्मीर के मूल निवासी है। इसलिए अगर कोई कहते है की भारत ने कश्मीर पर कब्ज़ा कर लिया है यह बिलकुल गलत है। 14वी सताब्दी में तुर्किस्तान से आये एक क्रूर आतंकी मुस्लिम दुलुचा ने 60,000 लोगो की सेना के साथ कश्मीर में आक्रमण किया और कश्मीर में मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना की। दुलुचा ने नगरो और गावो को नस्त कर दिया और हजारो हिन्दुओ का नरसंघार किया। बहुत सारे हिन्दुओ को जबरदस्ती मुस्लिम बनाया गया। बहुत सारे हिन्दुओ ने जो इस्लाम नहीं कबूल करना चाहते थे, उन्होंने जहर खाकर आत्महत्या कर ली और बाकि भाग गए या क़त्ल कर दिए गए या इस्लाम कबूल करवा लिए गए। आज जो भी कश्मीरी मुस्लिम है उन सभी के पूर्वजो को इन अत्याचारों के कारन जबरदस्ती मुस्लिम बनाया गया था।

भारत पर मुस्लिम आक्रमण अतिक्रमण - विश्व इतिहास का सबसे ज्यादा खुनी कहानी
http://www.youtube.com/watch?v=TMY2YV9WucY

भारत के खुनी विभाजन के बारे में जानने के लिए यह विडियो देखे:
http://www.youtube.com/watch?v=jGiTaQ60Je0

अधिक जानकीर के लिए इस लिंक को देखे
http://kasmiripandits.blogspot.com/2012/04/tragic-history-of-kasmir.html
http://en.wikipedia.org/wiki/Kashmir#Muslim_rule

पार्ट 2 १९४७ के समय कश्मीर
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1947 में ब्रिटिश संसद के "इंडियन इंडीपेनडेंस इ एक्ट" के अनुसार ब्रिटेन ने तय किया की मुस्लिम बहुल छेत्रो को पाकिस्तान बनाया जायेगा। 150 राजाओ ने पाकिस्तान चुना और बाकि 450 राजाओ ने भारत। केवल एक जम्मू और कश्मीर के राजा बच गए थे जो फैसला नहीं कर पा रहे थे। लेकिन जब पाकिस्तान ने फौज भेज कर कश्मीर पर आक्रमण किया तो कश्मीर के राजा ने भी हिंदुस्तान में कश्मीर के विलय के लिए दस्तख़त कर दिए। ब्रिटिशो ने यह कहा था की राजा अगर के बार दस्थ्खत कर दिया तो वो बदल नहीं सकता और जनता की आम राये पूछने की जरुरत नहीं है। तो जिन कानूनों के आधार पर भारत और पाकिस्तान बने थे उन नियमो के अनुसार कश्मीर पूरी तरह से भारत का अंग बन गया था। इसलिए कोई भी कहता है की कश्मीर पर भारत ने जबरदस्ती कब्ज़ा कर रहे है वो बिलकुल झूठ है।

अधिक जानकारी के लिए यह विडियो आप देख सकते है:
http://www.youtube.com/watch?v=gxhVDKRFh28

पार्ट 3 सितम्बर 14, 1989
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BJP के रास्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य और जाने माने वकील कश्मीरी पंडित तिलक लाल तप्लू का JKLF ने क़त्ल कर दिया। उसके बाद जस्टिस नील कान्त गंजू को गोली मार दिया गया। सारे कश्मीरी नेताओ की हत्या एक एक करके कर दी गयी । उसके बाद 300 से ज्यादा हिन्दू महिलाओ और पुरुषो की निर्संश हत्या की गयी। कश्मीरी पंडित नर्स जो श्रीनगर के सौर मेडिकल कोलेज अस्पताल में काम करती थी, का सामूहिक बलात्कार किया गया और मार मार कर उसकी हत्या कर दी गयी। यह खुनी खेल चलता रहा और अपने सेकुलर राज्य और केंद्र सरकार, मीडिया ने कुछ भी नहीं किया।

पार्ट ४ जनुअरी ४ 1990
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आफताब, एक स्थानीय उर्दू अखबार ने हिज्ब - उल - मुजाहिदीन की तरफ से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की, सभी हिन्दू अपना सामन पैक करे और कश्मीर छोर कर चले जाये। एक अन्य स्थानीय समाचार पत्र, अल सफा, इस निष्कासन आदेश को दोहराया। मस्जिदों में भारत और हिन्दू विरोधी भासन दिए जाने लगे। सभी कश्मीरी हिन्दू/मुस्लिमो को कहा गया की इस्लामिक ड्रेस कोड अपनाये। सिनेमा और विडियो पर्लोर वगरह बंद कर दिए गए। लोगो को मजबूर किया गया की वो अपनी घडी पाकिस्तान के समय के अनुसार करे ले।

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक और ब्लॉग आप देख सकते है:
http://kasmiripandits.blogspot.com/2012/04/when-kashmiri-pandits-fled-islamic.html
http://www.rediff.com/news/2005/jan/19kanch.htm - [19/01/90: When Kashmiri Pandits fled Islamic terror]

पार्ट 5 जनुअरी 19 1990
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सारे कश्मीरी पंडितो के घर के दरवाजो पर नोट लगा दिया जिसमे लिखा था "या तो मुस्लिम बन जाओ या कश्मीर छोर कर भाग जाओ या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ"। पाकिस्तान की तत्कालिल प्रधान मंत्री बेनार्जिर भुट्टो ने TV पर कश्मीरी मुस्लिमो को भारत से आजादी के लिए भड़काना सुरु कर दिया। सारे कश्मीर के मस्जिदों में एक टेप चलाया गया। जिसमे मुस्लिमो को कहा गया की वो हिन्दुओ को कश्मीर से निकाल बाहर करे। उसके बाद सारे कश्मीरी मुस्लिम सडको पर उतर आये। उन्होंने कश्मीरी पंडितो के घरो को जला दिया, कश्मीर पंडित महिलाओ का बलात्कार करके, फिर उनकी हत्या करके उनके नग्न सरीर को पेड़ पर लटका दिया गया। कुछ महिलाओ को जिन्दा डाला दिया गया और बाकियों को लोहे के गरम सलाखों से मार दिया गया। बच्चो को स्टील के तार से गला घोटकर मार दिया गया। कश्मीरी महिलाये उचे मकानों की छतो से खुद खुद कर जान देने लगी। कश्मीरी मुस्लिम, कश्मीरी हिन्दुओ के हत्या करते चले गए और नारा लगते चले गए की उनपर अत्याचार हुआ है और उनको भारत से आजादी चाहिए!!!

पार्ट 6 कश्मीरी पंडितो का पलायन
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350 ,000 कश्मीरी पंडित अपनी जान बचा कर कश्मीर से भाग गए। कश्मीरी पंडित जो कश्मीर के मूल निवासी है उन्हें कश्मीर छोरना पड़ा और तब कश्मीरी मुस्लिम कहते है की उन्हें आजादी चाहिए!!! यह सब कुछ चलता रहा लेकिन सेकुलर मीडिया चुप रही उन्होंने देश के लोगो तक यह बात कभी नहीं पहुचाई इसलिए देश के लोगो को आज तक नहीं पता चल पाया की क्या हुआ था कश्मीर में। देश विदेश के लेखक चुप रहे, भारत का संसद चुप रहा, देश के सारे हिन्दू, मुस्लिम, सेकुलर चुप रहे। किसी ने भी 350,000 कश्मीरी पंडितो के बारे में कुछ नहीं कहा। आज भी अपने देश के मीडिया 2002 के दंगो के रिपोर्टिंग में व्यस्त है। वो कहते है की गुजरात में मुस्लिम विरोधी दंगे हुए थे लेकिन यह कभी नहीं बताते की 750 मुस्लिमो के साथ साथ 250 हिन्दू भी मरे थे और यह भी कभी नहीं बताते की दंगो की सुरुआत मुस्लिमो ने की थी, जब उन्होंने 59 हिन्दुओ को ट्रेन में गोधरा में जिन्दा जला दिया था। हिन्दुओ पर अत्याचार के बात की रिपोर्टिंग से कहते है की अशांति फैलेगी, लेकिन मुस्लिमो पर हुए अत्याचार की रिपोर्टिंग से अशांति नहीं फैलती। इसे कहते है सेकुलर (धर्मानिर्पेछ्) पत्रकारिता!!!
http://kashmiris-in-exile.blogspot.com/2009/01/19-years-to-19th-day-of-1990-exodus-of.html

पार्ट 7 कश्मीरी पंडितो के आज की स्थिति
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आज 4.5 लाख कश्मीरी पंडित अपने देश में ही रेफूजी की तरह रह रहे है। पुरे देश या विदेश में कोई भी नहीं है उनको देखने वाला। कोई भी मीडिया नहीं है जो उनके बारे में हुए अत्याचार को बताये। कोई भी सरकार या पार्टी या संस्था नहीं है जो की विस्थापित कश्मीरियों को उनके पूर्वजो के भूमि में वापस ले जाने को तैयार है। कोई भी नहीं इस इस दुनिया में जो कश्मीरी पंडितो के लिए "न्याय" की मांग करे। कश्मीरी पंडित काफी पढ़े लिखे लोगो के तरह जाने जाते थे आज वो भिखारियों के तरह पिछले २२ सालो से टेंट में रह रहे है। उन्हें मुलभुत सुविधाए भी नहीं मिल प् रही है, पिने के लिए पानी तक की समस्या है। भारतीय और विश्व की मीडिया, मानवाधिकार संस्थाए गुजरात दंगो में मरे 750 मुस्लिमो (310 मारे गए हिन्दुओ को भूलकर) की बात करते है। लेकिन यहाँ तो कश्मीरी पंडितो की बात करने वाला कोई नहीं है क्योकि वो हिन्दू है। 20 ,000 कश्मीरी हिन्दू बस धुप की गर्मी के कारण मर गए क्योकि वो कश्मीर के ठन्डे मौसम में रहने के आदि थे।

अधिक जानकारी के लिए यह विडियो आप देख सकते है:

http://www.youtube.com/watch?v=kqSqn0id-IE[Shocking, Tragic and Horrible story of Kashmiri Pandits]

पार्ट 8 कश्मीरी पंडितो और भारतीय सेना के खिलाफ भारतीय मीडिया का सद्यन्त्र
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आज देश के लोगो को कश्मीरी पंडितो के मनावाधिको के बारे में भारतीय मीडिया नहीं बताती है लेकिन आंतकवादियों के मनावाधिको के बारे में जरुर बताती है. आज सभी को यह बताया जा रहा था है की ASFA नाम का किसी कानून का भारतीय सेना काफी ज्यादा दुरूपयोग किया है.. कश्मीर में अलगावादी संगठन मासूम लोगो की हत्या करवाते है.और भारतीय सेना के जवान जब उन अन्तंकियो के खिलाफ कोई करवाई करते है.. तो यह अलगावादी नेता अपने बिकी हुए मीडिया के सहायता से चीखना चिल्लाना सुरु कर देते है की देखो हमारे ऊपर कितना अत्याचार हो रहा है!!!

मित्रो बात यहाँ तक नहीं रुके है. अश्विन कुमार जैसे कुछ Director इंशाल्लाह कश्मीर नामक पिक्चर, वृत्तचित्र बना रहे है और यह पुरे विश्व की लोगो को यह दिखा रहे है की कश्मीर के भोले भाले मुस्लिम युवाओ पर भारतीय सेना के जवानों ने अत्याचार किया है.. अश्विन कुमार अपने वृत्तचित्र पुरे विश्व के पटल पर रख रहे है. हर तरह से देश और विदेश में लोगो को दिखा रहे है की गलती भारतीय सेना की है.. लेकिन जो सच्चाई है वो बिलकुल यह छिपा दे रहे है.

इस विडियो में देखे की किस प्रकार भारतीय सेना के खिलाफ सद्यन्त्र किया जा रहा है:
http://www.youtube.com/watch?v=LofOulSw07k - [Anti Hindu and Anti Indian Military - Indian Secular Media Exposed!]

पार्ट 9 निष्कर्ष:
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सारे मुस्लिम कहते है मोदी को फासी दो जबकि मोदी ने गुजरात की दंगो को समय रहते रोक दिया। लेकिन आज तक एक भी मुस्लिम को यह कहते नहीं सुना गया की कांग्रेस के नेताओ, गाँधी परिवार और अब्दुल्लाह परिवार को फाशी दो। जो लाखो कश्मीरी पंडितो के कत्लेआम देखते रहे ! मित्रो इस कहानी को अगर आप पढ़ चुके है तो अपने बाकि मित्रो के साथ शेयर करे ताकि उन्हें भी सत्य का ज्ञान हो। जो कश्मीर में हुआ था आज वो मुस्लिम बहुल केरला, पश्चिम बंगाल, हैदराबाद, UP के कुछ भागो में हो रहा है। हिन्दुओ पर आज अत्याचार देश के काफी जगहों में हो रहा है। लेकिन सेकुलर मीडिया कुछ बताती नहीं इसलिए आपको और हमें कुछ पता नहीं चल पता है और इसलिए हमारा या आपका कोई दोष भी नहीं है। अगर हमें कुछ पता ही नहीं चलेगा तो हम करेंगे क्या? आज जितने भी प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया है ज्यादातर को अरब से तेल का पैसा मिलता है। यह सेकुलर मीडिया हिन्दुओ के विनाश के बाद ही रुकेगी क्योकि हिन्दू संस्था, पार्टी कभी मीडिया पर ध्यान ही नहीं देती। आज की सेकुलर मीडिया आधी जिहादियो और आधी कांग्रेस्सियो के नियत्रण में है। हिन्दुओ के साथ हो रहे अत्याचार को बताने के लिए एक भी टीवी या प्रिंट मीडिया नहीं है।

मित्रो हम नहीं चाहते एक और कश्मीर बने। हम नहीं चाहते की हमारे बच्चे 10 सालो के बाद केरलाइ हिन्दू, बंगाली हिन्दुओ के बारे में कहानिया सुने जैसा हम आज कश्मीरी हिन्दुओ के बारे में सुनते है!!!



धर्मकी रक्षा करो धर्म हमारी रक्षा करेगा

कनाडा के प्राइम मिनिस्टर मि. पीअर ट्रुडो ने
जब गीता पढ़ी तो वे दंग रहे गये। मि. पीअर.
ट्रुडो ने कहाः "मैंने बाइबिल पढ़ी, एंजिल पढ़ा,
और भी कई धर्मग्रन्थ पढ़े। सब ग्रन्थ अपनी-
अपनी जगह पर ठीक हैं लेकिन हिन्दुओं का यह
श्रीमद् भगवद गीता रूपी ग्रन्थ तो अदभुत है !
इसमें किसी भी मत-मजहब, पंथ, संप्रदाय
की निंदा स्तुति नहीं है बल्कि इसमें
तो मनुष्यमात्र के विकास की बात है। शरीर
स्वस्थ, मन प्रसन्न और बुद्धि में समत्व योग
का, ब्रह्मज्ञान का प्रकाश जगानेवाला ग्रन्थ
भगवद् गीता है... गीता केवल हिन्दुओं
का ही धर्मग्रन्थ नहीं है, मानवमात्र
का धर्मग्रन्थ है।



भारतवासियों को हिन्दी दिवस के अवसर पर हार्दिक बधाइयाँ ..

आज आप सभी भारतवासियों को हिन्दी दिवस के अवसर पर हार्दिक बधाइयाँ ॥
हिन्दी दिवस भारत में प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। हिन्दी, विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है और अपने आप में एक समर्थ भाषा है। प्रकृति से यह उदार ग्रहणशील, सहिष्णु और भारत की राष्ट्रीय चेतना की संवाहिका है। इस दिन विभिन्न शासकीय - अशासकीय कार्यालयों, शिक्षा संस्थाओं आदि में विविध गोष्ठियों, सम्मेलनों, प्रतियोगिताओं तथा अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। कहीं- कहीं 'हिन्दी पखवाडा' तथा 'राष्ट्रभाषा सप्ताह' इत्यादि भी मनाये जाते हैं। विश्व की एक प्राचीन, समृद्ध तथा महान भाषा होने के साथ ही हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा भी है, अतः इसके प्रति अपना प्रेम और सम्मान प्रकट करने के लिए ऐसे आयोजन स्वाभाविक ही हैं, परन्तु, दुःख का विषय यह है की समय के साथ - साथ ये आयोजन केवल औपचारिकता मात्र बनते जा रहे हैं

भारत की स्वतंत्रता के बाद 14 सितंबर, 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी की खड़ी बोली ही भारत की राजभाषा होगी। इसी महत्त्वपूर्ण निर्णय के महत्त्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर सन् 1953 से संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष हिन्दी - दिवस के रूप में मनाया जाता है।
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में 13 सितम्बर, 1949 के दिन बहस में भाग लेते हुए तीन प्रमुख बातें कही थीं --

किसी विदेशी भाषा से कोई राष्ट्र महान नहीं हो सकता।
कोई भी विदेशी भाषा आम लोगों की भाषा नहीं हो सकती।
भारत के हित में, भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के हित में, ऐसा राष्ट्र बनाने के हित में जो अपनी आत्मा को पहचाने, जिसे आत्मविश्वास हो, जो संसार के साथ सहयोग कर सके, हमें हिन्दी को अपनाना चाहिए।
यह बहस 12 सितम्बर, 1949 को 4 बजे दोपहर में शुरू हुई और 14 सितंबर, 1949 के दिन समाप्त हुई। 14 सितम्बर, की शाम बहस के समापन के बाद भाषा संबंधी संविधान का तत्कालीन भाग 14 क और वर्तमान भाग 17, संविधान का भाग बन गया। संविधान - सभा की भाषा - विषयक बहस लगभग 278 पृष्ठों में मुद्रित हुई । इसमें डॉ. कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी और श्री गोपाल स्वामी आयंगार की महती भूमिका रही। बहस के बाद यह सहमति बनी कि संघ की भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी, किंतु देवनागरी में लिखे जाने वाले अंकों तथा अंग्रेज़ी को 15 वर्ष या उससे अधिक अवधि तक प्रयोग करने के लिए तीखी बहस हुई। अन्तत: आयंगर - मुंशी फ़ार्मूला भारी बहुमत से स्वीकार हुआ। वास्तव में अंकों को छोड़कर संघ की राजभाषा के प्रश्न पर अधिकतर सदस्य सहमत हो गए। अंकों के बारे में भी यह स्पष्ट था कि अंतर्राष्ट्रीय अंक भारतीय अंकों का ही एक नया संस्करण है। कुछ सदस्यों ने रोमन लिपि के पक्ष में प्रस्ताव रखा, लेकिन देवनागरी को ही अधिकतर सदस्यों ने स्वीकार किया। स्वतन्त्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर काफ़ी विचार - विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जो भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343 (1) में इस प्रकार वर्णित है :-- संघ की राज भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा।



हिन्दी दिवस की शुभकामनाएँ..

सभी मित्रों को \"सरकारी हिन्दी दिवस\" की शुभकामनाएँ... 
\"सरकारी\" इसलिए लिखा, क्योंकि हम तो रोज़ ही हिन्दी में लिखते हैं.!

हम हिन्दी दिवस मानते है ?

हाँ 365 दिन मनाते हैं ।

ये सोचने का मुद्दा है कि क्या हमे अपने ही देश में अपनी ही भाषा का दिवस बनाने की जरुरत है ? क्या हिंदी कोई विदेशी भाषा है ? क्या फ्रांस कभी फ्रेंच डे मनाता है या रूस, जर्मनी, स्वीडन, पोलैंड, इटली, पुर्तगाल, स्पेन, इंग्लैंड आदि आदि अपने ही देश में अपनी भाषा का दिवस मानते है ?

भारत में हिंदी दिवस एक लानत ही है, हिंदी हमारी 365 दिवस की भाषा है हिंदी को मात्र 14 Sep की भाषा बताना अपनी संस्कृति के साथ ही मजाक है।
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चौदह सितंबर समय आ गया है एक और हिंदी दिवस मनाने का आज हिंदी के नाम पर कई सारे पाखंड होंगे जैसे कि कई सारे सरकारी आयोजन हिंदी में काम को बढ़ावा देने वाली घोषणाएँ विभिन्न तरह के सम्मेलन इत्यादि इत्यादि। हिंदी की दुर्दशा पर घड़ियाली आँसू बहाए जाएँगे, हिंदी में काम करने की झूठी शपथें ली जाएँगी और पता नहीं क्या-क्या होगा। अगले दिन लोग सब कुछ भूल कर लोग अपने-अपने काम में लग जाएँगे और हिंदी वहीं की वहीं सिसकती झुठलाई व ठुकराई हुई रह जाएगी।

ये सिलसिला आज़ादी के बाद से निरंतर चलता चला आ रहा है और भविष्य में भी चलने की पूरी पूरी संभावना है। कुछ हमारे जैसे लोग हिंदी की दुर्दशा पर हमेशा रोते रहते हैं और लोगों से, दोस्तों से मन ही मन गाली खाते हैं क्यों कि हम पढ़े-लिखे व सम्मानित क्षेत्रों में कार्यरत होने के बावजूद भी हिंदी या अपनी क्षेत्रीय भाषा के प्रयोग के हिमायती हैं। वास्तव में हिंदी तो केवल उन लोगों की कार्य भाषा है जिनको या तो अंग्रेज़ी आती नहीं है या फिर कुछ पढ़े-लिखे लोग जिनको हिंदी से कुछ ज़्यादा ही मोह है और ऐसे लोगों को सिरफिरे पिछड़े या बेवक़ूफ़ की संज्ञा से सम्मानित कर दिया जाता है।

सच तो यह है कि ज़्यादातर भारतीय अंग्रेज़ी के मोहपाश में बुरी तरह से जकड़े हुए हैं। आज स्वाधीन भारत में अंग्रेज़ी में निजी पारिवारिक पत्र व्यवहार बढ़ता जा रहा है काफ़ी कुछ सरकारी व लगभग पूरा ग़ैर सरकारी काम अंग्रेज़ी में ही होता है, दुकानों वगैरह के बोर्ड अंग्रेज़ी में होते हैं, होटलों रेस्टारेंटों इत्यादि के मेनू अंग्रेज़ी में ही होते हैं। ज़्यादातर नियम कानून या अन्य काम की बातें किताबें इत्यादि अंग्रेज़ी में ही होते हैं, उपकरणों या यंत्रों को प्रयोग करने की विधि अंग्रेज़ी में लिखी होती है, भले ही उसका प्रयोग किसी अंग्रेज़ी के ज्ञान से वंचित व्यक्ति को करना हो। अंग्रेज़ी भारतीय मानसिकता पर पूरी तरह से हावी हो गई है। हिंदी (या कोई और भारतीय भाषा) के नाम पर छलावे या ढोंग के सिवा कुछ नहीं होता है।

इस अँग्रेजी की गुलामी से बाहर निकलना चाहते हैं यहाँ जरूर जरूर click करे !
और आज अपना कीमती समय मातृभाषा की महत्वता जानने के लिए दें !
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http://www.youtube.com/watch?v=ZqtRzpv52Ls

वन्देमातरम !



Friday, September 13, 2013

मौलाना महमूद मदनी

मौलाना महमूद मदनी का वक्तव्य मै टीवी चैनल पर आज सुना. इनके दिलो में बहुत दुःख था.सिर्फ मुसलमानों का दर्द विस्तार से बता रहे थे.
मुसलमानों ने सपा को वोट दिया,भरोसा किया किन्तु मुलायम सिंह ने हमको धोखा दिया,अब तो यह सरकार बर्खास्त होनी चाहिए.. -कहते कहते एक बात कह गए-जो वास्तव में सही है.सभी मुसलमानों को इस पर विचार करना चाहिए.

****मुसलमान भारत पाकिस्तान बटवारे के बाद इस देश में अपनी मर्ज़ी से रुके.,किसी ने मुसलमानों को जबरदस्ती इस देश में नहीं रोका.****

बिलकुल सही बात कहा मदनी साहब ने --मै इनकी बात से पूर्ण सहमत हूँ--
मदनी साहब जब आप इस देश में सुखी नहीं है.आप को सारी पार्टिया धोखा देती है.कोई आप लोगो की सुनता नहीं है.मुजफ्फरनगर के दंगो में आप को PAC से भी शिकायत है.न्यायिक जांच को आप मानेगे नहीं...सेना की घर घर तलाशी आपको पसंद नहीं है...अब आप सपा की बर्खास्तगी की मांग कर रहे है..

आपने कभी भी इस देश के बहुसंख्यक हिन्दुओ के हित के बारे में नहीं सोचा.आपने कभी इस देश के मूलधर्म ''सनातन धर्म '''के देवताओ के सम्मान में कोई काम नहीं किया.हमारा धर्म,देवी-देवताओ,वन्देमातरम तक आप के इस्लाम और सांसदों को बुरा लगता है.

माना की आप इस देश में पैदा हुए है.किन्तु आपकी सोच,आपका मजहब विदेशी ही है.अरबी समाज को बढ़ावा देते है.फिर भी हमारे देश के सेक्युलर नेता आपके विदेशी मजहब की ''अरबी टोपी'''भी पहन लेते है.ताकि आप लोग खुश रहे.यू.पी.मुख्यमंत्री अखिलेश जी ने दंगो के दौरान बहुसंख्यक हिन्दुओ की परवाह न करते हुए ''अरबी टोपी ''पहनकर गए थे.फिर भी आप लोग उनको भी लानत ही दे रहे है.भला कौन आप लोगो पर विश्वास करेगा.आप लोग तो हर देश में असंतुष्ट ही रहते है.

तब तो आपका वक्तब्य सही है...किसी ने जबरदस्ती आप लोगो को भारत में रहने के लिए नहीं रोका है.आप लोग भारत में रहने के पुराने फैसले पर पुनर्विचार करे..जिस देश में आपको ख़ुशी मिले वही पर जाये.अफ़सोस मत करिए.सेक्युलर नेताओ को लानत मत भेजिए.मत कोसिये....इससे देश के बहुसंख्यक हिन्दुओ को भी ख़ुशी मिलेगी----



कश्मीर पे अमेरिका की नज़र...

पूरी post नहीं पढ़ सकते !
तो यहाँ click करे !!
http://youtu.be/2AbadmEh_vc

दोस्तो पाकिस्तान की साजिश है ! कि 1971 में भारत ने पाकिस्तान से बांग्लादेश अलग करवा दिया !
तो अब वो भारत का जम्मु और कश्मीर अलग करवाना चाहता है ! इसी लिए 1971 के बाद पाकिस्तान में जितने भी शासक हुए उन्हों ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया हे !

औरआज आतंकवाद वहाँ इतना बढ़ चूका हे की अब तक हमारे 1 lakh से ज्यादा जवान उसमे शहीद हो चुके हे| जम्मु कश्मीर हमारे देश में रहे इसके लिए हमारे देश में संविधान बदल गया है |
संविधान में एक Article 370 दाखिल किया गया..उसके तहत जम्मु कश्मीर को एक देश का दरज्जा दिया गया है |

भारत का सुप्रीम कोर्ट कोई भी फैसला सुनाये जम्मु कश्मीर में वो लागु नहीं होता |
भारत की संसद जो भी कानून बनाये जम्मु कश्मीर में वो लागु नहीं होता |

हमारी संसद जो कानून बनाती हे उस कानून का जब आप पहला पन्ना पढेंगे उसमे पहले ही वाक्य में कहा जाता हे Except Jammu and Kashmir. मतलब ये कानून बनाया जा रहा हे जम्मु कश्मीर को छोड़कर|
·
हमारी सरकार ने आज़ादी के 64 साल बाद ऐसे कई कानून बनाये हे जो आप पर लागु है ,
हम पर लागु हे,सारे देश पर लागु है लेकिन जम्मु कश्मीर के ऊपर लागु नहीं है |
उनके कानून उनकी संसद में जिनको वो Assembly कहते हे वहाँ बनते है |
भारत की संसद मे नहीं बनते !

आपको शायद मालूम नहीं होगा की आज़ादी के कई सालो बाद तक जम्मु कश्मीर के मुख्यमंत्री को “सदरे रियासत “ कहा जाता था जिसको हिंदी में प्रधानमंत्री कहते है |

उनका झंडा अलग हे भारत का झंडा अलग हे |

उनका कानून अलग है भारत का कानून अलग है |

उनका संविधान अलग हे भारत का संविधान अलग हे |

फिर हमारी सरकार कहती हे की, “Jammu and Kashmir is the INTEGRAL PART OF INDIA (जम्मु कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हे )”
यह भारत सरकार हमें मुर्ख बनाने के लिए कह रही है ताकि की हम जम्मु कश्मीर को भारत मे विलय के लिए बगावत ना करे |

आपको सुनकर हेरानी होगी की भारत सरकार आपके लिए कोई भी खर्चा करे उसकी पाई पाई का हिसाब CAG (Controller Auditor General of India) रखता है !
लेकिन जम्मू कश्मीर के लोगो के ऊपर हजारों साल से करोडो रुपये खर्च होता है उसका हिसाब किसी के पास नहीं है !!

क्योकि जम्मू कश्मीर का हिसाब दिल्ली में नहीं रखा जाता उनका हिसाब जम्मू कश्मीर की सरकार के पास रखा जाता है |

CAG (Controller Auditor General of India)को जब पूछा गया कि जम्मू कश्मीर कि सरकार ने आजतक कितना पैसा कहाँ खर्च किया है इसका हिसाब दो ???

तो जवाब आया हमारे पास नहीं है कश्मीर की सरकार को पूछो !!

और जब कश्मीर की सरकार को चिठी लिखी गई ! तब वहाँ से जवाब आया !कि हम किसी भारतवासी को अपना हिसाब बताने के लिए मजबूर नहीं है !!

वो मानते ही नहीं की हम भारत का अंग है ....हम जबर दस्ती कहते हे की यह भारत का अंग है |

पाकिस्तान वहा जबरदस्ती आतंकवादी भेजता हे,उनके लिए पैसे उपलब्ध कराता रहता हे|आपको क्या लगता हे पाकिस्तान (जो खुद भुखमरी के कगार पर खड़ा हे) ! जिसका 95 % बजट विदेशी कर्जे पर बनता है !! जो सुई भी खुद नहीं बना सकता !

उसमे में उतनी ताकत हे की वो 60 सालो तक आतंकवादी ओ को पैसा भेज सके?????

आपको शायद पता होगा की पाकिस्तान में इतना दम नहीं हे लेकिन पाकिस्तान को ये सब करने के लिए अमरीका उकसाता रहता है और हर साल उसको साहयता के नाम पर करोडो रूपये उपलब्ध कराता रहता है |

और पाकिस्तान वो पैसा जम्मू कश्मीर में भेजता है और आखिर वो पैसा लश्करे तैयबा,जैश ए मोहमद ,हिजबुल मुजाहिद्दीन जेसे खतरनाक आतंकवादी संगठनो को पैसा मिलता हे और वो पैसे से वो पैसे से सारे देश में बम ब्लास्ट करते है |

हमारी आर्मी की रिपोर्ट के अनुसार जम्मू कश्मीर में जो भी सभी आतंकवादी गतिविधि करते हे वो सब विदेशो से घुसाए गए है !पाकिस्तान से और अफघानिस्तान से रोज आ रहे हैं ! और पेसो की लिए यह सब करते हे|

हमारी सरकार भी कैसी विचित्र है जम्मु कश्मीर में एक संगठन हे उसका नाम हे हुर्रियत कोन्फेरेंस यह छोटी छोटी पार्टियो का एक बड़ा समूह हे|इस हुर्रियत कोन्फेरेंस में एक आदमी हे उसका नाम हे यासीन मलिक आपने शायद टीवी पर देखा हो|उस यासीन मलिक को जानबूझ कर भारत सरकार ने सुपर हीरो बनाकर रखा है

क्यों????

भारत सरकार जब भी बातचीत करती है !यासीन मालिक से ही करती है !इन चक्करों में अखबारों में नाम आता है , टीवी की चर्चा में नाम आता है और वो चर्चा में चढ़ता ही चला जाता है वो चर्चा फिर अमरिका तक जाती हे और बाद में अमरीका की सब N.G.O. से सीधा पैसा उसको आना शरू हो जाता है !|

आप पूछेंगे की अमरीका को क्या Interest हे ?????

भारत का जो जम्मु कश्मीर हे वो अमरीका को चाहिए.....पाकिस्तान के लिए तो ये कुछ इतना काम का नहीं है | पाकिस्तान खुद अपने देश को संभाल नहीं पा रहा है ! जो हमारा छीना हुआ कश्मीर उसके पास है !वही उससे संभाला नहीं जो रहा ! जम्मु और कश्मीर को क्या संभालेगा|

अमरीका को इसलिए चाहिए क्योकि जम्मु कश्मीर की सीमा चीन से लगी हुई है |अमरीका और चीन का पुरानी दुश्मनी है |तो अमरीका की योजना हे की एक दिन चीन पर हमला करना हे जेसा इराक पे किया तो हमला करने के लिए अमरीका के जहाजों को एक ऐसा ग्राउंड चाहिए जहाँ से हवाई जहाज उड़े और चीन पर जाकर मिसाइल डाले और वो स्थान जम्मु में है !|
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आपके मन मे सवाल आएगा ! कि राजीव भाई किस आधार पर कहते है !????
कि अमेरिका को कश्मीर पर कब्जा कर वहाँ सनिक अड्डा बनाना है ????
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ध्यान से पढे !

कुछ साल पहले अमेरिका कि विदेश मंत्री हेलेरी कलिंटन भारत आई ! और हमारे यहाँ एक tv चैनल जिसका नाम आजतक है ! आजतक के प्रभु चावला ने उसका interview लिया !
और interview मे एक ऐसा सवाल पूछा ! जिसका जवाब गलती से हेलेरी कलिंटन सच बता दिया !!
(कई बार ऐसा हो जाता मुह से कोई छुपाने वाली बात सच निकाल जाती है !!)

प्रभु चावला ने पूछा !कि अमेरिका ने पिछले 50 साल मे united nation मे कश्मीर मुद्दे पर भारत का हमेशा विरोध किया है! पाकिस्तान का साथ दिया है क्यूँ ???

(आप जानते है 1952 -53 से जम्मू कश्मीर का मुद्दा नेहरू कि मूर्खता के कारण united nation मे है !
वरना युद्ध मे तो भारतीय सेनिकों ने बुरी रोंद दिया था पाकिस्तान को ! और दो दिन अगर और मिलते तो लाहोर भी भारत मे आ जाता ! तब नेहरू को internationalism याद आ गया ! और बिना मतलब के मुद्दा united nation मे ले गाया ! और तब से अमेरिका उसको दबा कर बैठा है ! और हमेशा भारत के खिलाफ पाकिस्तान का साथ देता गया !))

तो प्रभु चावला ने पूछा ! एक तरफ आप कहते है भारत से रिश्ते अच्छे बनाने है और ! आपने हमेशा पाकिस्तान का साथ दिया है !
आखिर आप चाहते क्या है ?? ????????

तो हेलेरी कलिंटन ने गलती से बोल दिया कि हमारी अमेरिका की संसद मे प्रस्ताव पारित हुआ है ! कि जम्मू कश्मीर पर हमे सेनिक अड्डा बनाना है !

तो उससे पूछा प्रस्ताव कब पारित हुआ था ??

तो उसने कहा 1989 मे !!!

तो उससे पूछा प्रस्ताव नमबर ??!

तब एक दम हलेरी कलिंटन को लगा कुछ गलत बोल दिया है ! तो उसने बात को घूमा दिया !
और कहा मुझे ज्यादा नहीं मालूम ! बस ऐसा है वैसा है !!
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राजीव भाई वो interview सुन रहे थे ! तो उन्होने बिना देरी किए हुये अमेरिका मे अपने कुछ दोस्तो को फोन लगाया और कहा ! पता करो 1989 मे अमेरिका कि संसद मे ऐसा कौन सा प्रस्ताव पारित हुआ ??
जिसने कहा गया अमेरिका को जम्मू कश्मीर चाहीये वहाँ सेनिक अड्डा बनाने के लिए ??

तो पता चला प्रस्ताव का नंबर है 657 और 1989 को अमरीकी संसद मे पास हुआ !! और उसमे कहा गया है कि एक न दिन तो अमेरिका को जम्मू कश्मीर पर कब्जा कर सैनिक अड्डा बनाना ही है !

क्यूँ ??

कारण एक ही है ! जम्मू कश्मीर ही एक ऐसा area है ! जहां अमेरिका सैनिक अड्डा बनाकर चीन ,भारत और पाकिस्तान तीनों पर नजर रख सकता है ! और भविष्य मे कभी चीन हमला करना पड़े ! तो उससे बढ़िया को स्थान नहीं !

इसलिए अमरीका को ये चाहिए |
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तो अमरीका बंदूक चला रहा हे पाकिस्तान के कंधे पर रखके और ये बंदूक हे की जम्मु कश्मीर भारत से अलग हो जाये ! अपना खुद देश बना ले (जेसे बांग्लादेश बना )|अमरीका उसको सहाय देकर अपने प्रभाव में ले लेगा और वहा सैनिक अड्डा बनाएगा और वो सैनिक अड्डा एक दिन चीन के खिलाफ काम आयेगा|ये राजनीती चल रही हे भारत को बर्बाद करने के लिए |

अगर ये राजनीती चल रही हे भारत को बर्बाद करने के लिए !!!!

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अब आप कहेंगे कि हम क्या कर सकते है !! तो आपसे एक ही निवेदन है ! आप कुछ साल के लिए जम्मू कश्मीर जाना छोड़ दो !
आप कहेगे सारी ज़िंदगी इसी केलिए तो पैसा इख्ठा करते है कि जम्मू कश्मीर घूमने जाएँगे !
और आप कह रहे है वहाँ जाना छोड़ दो !??

मित्रो आपको मालूम नहीं ! जब आप वहाँ घूमने जाते है तो जितना tax भारत सरकार आपके ऊपर नहीं लगती उससे कई गुना ज्यादा tax जम्मू कश्मीर सरकार आपके ऊपर लगती है !!

और वो सारा पैसा कुछ हाथो से घूमता हुआ आतंकवादियो के पास जाता है ! और सरकार मे आतंकवादियो के आदमी बैठे हुई है !

वैष्णो देवी के मंदिर का सारा हिसाब किताब shrine bord संभालता है ! हर साल लाखो हिन्दू करोड़ो रुपए वहाँ चढ़ाते है !! और आप वहाँ कि सरकार से एक पैसे का हिसाब नहीं मांग सकते कि उन्होने कहाँ खर्च किया कितना खर्च किया !!!
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दोस्तो सेना जब युद्ध लड़ती है ! तो उसका मुख्य काम होता है ! दुश्मन की supply line काटना !और कश्मीर के आतंकवादियो कि supply line भारत सरकार के मिलने वाले पैसे के बाद हमारे हाथ से गुजर कर जाती है !! सिर्फ 2 या 3 साल के लिए ही हम सब भारत के लोग कश्मीर घूमने जाना छोड़ दे ! तो 100 % वहाँ सरकार कि आर्थिक कमड़ टूट जाएगी !! और जम्मू कश्मीर झकमार के हिंदुस्तान मे वापिस आ जाएगा !
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इसके इलावा आजकल वहाँ एक काम शुरू हुआ है ! कश्मीर से कुछ लोग आपके शहर आते है शाले बेचने ले किए ! आपको मालूम नहीं है कि कौन उनमे से आतंकवादी है कौन सच्चा भारतीय !! आप हाथ जोड़ कर उनको माना करे दे कि हम आपकी शाले तब तक नहीं खरीदेगे !

जब तक जम्मू कश्मीर घोषणा न कर दे ! कि वे भारत का अभिन्न अंग है !!!
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तो मित्रो आप जितना कर सकते है उतना करे !! उनकी supply line काटे !!

पूरी post पढ़ी बहुत बहुत आपका धन्यवाद !!

यहाँ जरूर जरूर click कर देखें !!

http://youtu.be/2AbadmEh_vc
http://youtu.be/2AbadmEh_vc

वन्देमातरम ! भारत माता की जय !!